धनु संक्रांति सूर्य के धनु राशि में प्रवेश को दर्शाता है और इसे हिंदू पंचांग में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन आध्यात्मिक नवीनीकरण, शुद्धि और नए सौर महीने के प्रारंभ का प्रतीक है। इस दिन श्रद्धालु सुबह स्नान करते हैं और सूर्य देव तथा भगवान जगन्नाथ की पूजा कर पुण्य कमाते हैं।
पौष अमावस्या हिन्दू पंचांग के पौष माह की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। यह दिन विशेष रूप से पितृ तर्पण, दान-पुण्य और आत्मशुद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन सूर्यदेव और पितरों की आराधना का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों में इसका वर्णन आत्मिक ऊर्जा बढ़ाने और नकारात्मकता को दूर करने वाले दिन के रूप में किया गया है।
तुलसी पूजा का पर्व भगवान विष्णु की प्रिय तुलसी जी की आराधना के रूप में मनाया जाता है। यह दिन धर्म, शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक माना गया है। इस दिन घर-घर में तुलसी महारानी का विशेष पूजन किया जाता है और भक्त तुलसी के पौधे के चारों ओर दीप प्रज्वलित करते हैं।
मार्तण्ड सप्तमी (श्री गुरु गोबिंद सिंह जयंती) सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है। यह दिन पौष माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को पड़ता है और यह साहस, विश्वास और धार्मिकता का प्रतीक है।
पुत्रदा एकादशी पुत्र की प्राप्ति के लिए विशेष महत्व रखती है। यह दिन भगवान विष्णु की उपासना के लिए समर्पित है और यह श्रावण या पौष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है।
पुत्र एकादशी वैष्णव परंपरा में भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। यह एकादशी पौष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है और विशेष रूप से संतान की प्राप्ति और परिवार की समृद्धि के लिए उपवास और पूजा की जाती है।